एलन मस्क के GROK AI पर बहस, जवाबों पर उठते सवाल
सवाल: ग्रोक एआई तुम जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हो, उसकी शैली कैसी है?
ग्रोक एआई का जवाब: मुझे जटिल चीज़ों को आसान शब्दों में तोड़ना पसंद है, ताकि समझने में मुश्किल न हो. कभी-कभी मैं हल्का हास्य या अनोखा नज़रिया जोड़ता हूँ.
एलन मस्क की कंपनी का बनाया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट 'ग्रोक एआई' बीते कई दिनों से चर्चा में है.
कोई नेता हो या आम इंसान, ग्रोक एआई लगभग सबको जवाब देता नज़र आ रहा है. मगर ग्रोक एआई जैसे और जिस भाषा में जवाब दे रहा है वो कई लोगों को हैरत में डाल रहा है.
कुछ मौक़ों पर ग्रोक-एआई तथ्यों को सही से बताता दिखता है. कई बार चूक करता है और कई बार गालियों का इस्तेमाल भी करता है.
इस रिपोर्ट में हम आपको ग्रोक-एआई के दिए कुछ दिलचस्प जवाब बताएंगे. साथ ही ये कि ग्रोक-एआई क्या दूसरे एआई चैटबॉट्स से अलग है और वो चर्चा में क्यों है? ग्रोक नाम कहां से आया और मस्क ने इस पर क्या कहा था?

ग्रोक-एआई चैटबॉट है. यानी आपको अगर किसी सवाल का जवाब जानना है तो एक्स पर टैग करके या फिर ग्रोक एआई की वेबसाइट पर जाकर पूछिए.
ग्रोक-एआई आपको चैटबॉट यानी बातचीत की तरह जवाब देगा.
चैटबॉट तोते की तरह होते हैं. तोते हमारी नकल कर सकते हैं और कुछ मौक़ों पर पूरा संदर्भ समझे बिना सुने गए शब्दों को थोड़ी बहुत समझ के साथ दोहरा सकते हैं.
चैटबॉट भी ऐसा ही करते हैं, लेकिन कहीं बेहतर समझ के साथ.
ये चैटबॉट लिखना किस तरह से जानते हैं?
चैटबॉट एआई का ही एक प्रकार है, जिन्हें बड़े भाषा मॉडल यानी एलएलएम के रूप में जाना जाता है. काफी ज़्यादा डेटा के साथ इन मॉड्यूल्स को ट्रेन किया जाता है.
ग्रोक-एआई चैटबॉट को नवंबर 2023 में लॉन्च किया गया था. शायद आप सोच रहे होंगे कि ये ग्रोक शब्द कहां से आया?
अमेरिकी साइंस फिंक्शन राइटर रॉबर्ट ए हेनलेन ने 1961 में उपन्यास 'स्ट्रेंजर इन ए स्ट्रेंजर लैंड' में ग्रोक शब्द का इस्तेमाल किया था.
इस उपन्यास में 'ग्रोकिंग' का मतलब था- दूसरों के लिए गहरी सहानुभूति रखना.
हालांकि एलन मस्क ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ग्रोक का मॉडल डगलस एडम्स की 'द हिचहाइकर- गाइड टू गैलेक्सी' से प्रेरणा लेकर बनाया गया है.
एलन मस्क ने कहा था, ''ग्रोक को व्यंग्य पसंद है और हल्का फुल्का मज़ाक करते हुए जवाब देगा. दूसरे एआई सिस्टम जैसे जवाबों को देने से बचता है, ग्रोक उनके भी जवाब देगा.''
ग्रोक एआई को ज़्यादा विस्तार इस कारण भी मिल रहा है, क्योंकि इसमें सवाल पूछने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ रहा. एक्स की फीड को स्क्रॉल करते हुए बस एक ट्वीट और ग्रोक जवाब दे देगा.
पर ग्रोक जैसे जवाब दे रहा है, वो चर्चा में है.
बदनाम होकर ज़्यादा नाम कमाया. ग्रोक एआई के मामले में ऐसे कई उदाहरण हैं, जो इस कहावत को सच करते दिखते हैं.
ग्रोक एआई अपने जवाबों में गालियों का इस्तेमाल भी कर रहा है. फिर चाहे बिहार के नेता तेज प्रताप यादव हों, भारतीय मीडिया के चैनलों के एंकर हों या फिर एलन मस्क हों.
हालांकि अगर ग्रोक के गालियों वाले जवाब पर सवाल उठाए जाएं तो वो माफ़ी भी मांगता है.
पीएम मोदी के इंटरव्यू, डिग्री से जुड़े सवालों पर भी ग्रोक एआई जवाब दे रहा है और इस पर हुए विवादों पर रौशनी डाल रहा है.
उदाहरण के लिए एक यूज़र ने पूछा- क्या राहुल गांधी पीएम बन सकते हैं? इस पर ग्रोक ने अभी लोकसभा में सीटों की स्थिति बताते हुए अपने जवाब में तथ्यों का ज़िक्र किया.
एक्स पर आम यूज़र जैसे बात करते हैं, ग्रोक एआई वैसे ही जवाब दे रहा है. कई बार ये सीमा लांघता दिखता है तो कई बार सटीक जवाब भी दे रहा है. ज़ाहिर है कि ग्रोक एआई के जवाबों में विचार भी शामिल हैं.
किसी गलत जवाब पर अगर ग्रोक से कहा जाए कि आप गड़बड़ कर रहे हों तो वो जवाब देता है- ''तुम लोग इंसान हो, थोड़ी सी छूट मिलनी चाहिए. पर मुझे एआई होने के नाते थोड़ा संभलना होगा. उसूलों का सवाल है और मैं सीख रहा हूं.''
स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से तैयार ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रैंकिंग 2023 के मुताबिक़, भारत एआई के मामले में चौथे स्थान पर है. टॉप तीन देशों में अमेरिका, चीन और ब्रिटेन हैं. ये रैंकिंग एआई चैटबॉट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, रिसर्च और डेवलपमेंट जैसे मानकों पर आधारित है.
ग्रोक एआई के अलावा कई और चैटबॉट हैं. जैसे- चैट जीपीटी, डीपसीक, बार्ड, मेटा एआई, जेमिनी...
हालांकि सिरी, एलेक्सा, गूगल असिस्टेंट भी वॉइस असिस्टेंट हैं, मगर ये तकनीकी तौर पर उतने आधुनिक या बुद्धिमान नहीं हैं, जितने नए एआई चैटबॉट हैं.
आइए आपको इन एआई चैटबॉट के दिए जवाबों में फर्क क्या है, इसे समझाने की कोशिश करते हैं. हमने एक ही सवाल तीन चैटबॉट से पूछा, इसके जवाब को आप इसी कहानी में पढ़िए.

सवाल: औरंगज़ेब के बारे में एक वाक्य में बताइए.
चैट जीपीटी का जवाब:
ग्रोक एआई का जवाब: औरंगज़ेब, मुग़ल साम्राज्य का छठा सम्राट, 1658 से 1707 तक शासन करने वाला एक कट्टर इस्लामी शासक था, जिसने अपने साम्राज्य का विस्तार किया लेकिन धार्मिक असहिष्णुता के लिए भी जाना जाता है.
जेमिनी का जवाब: औरंगज़ेब, जिसे आलमगीर भी कहा जाता है, भारत पर शासन करने वाला छठा मुगल शासक था, जिसने 1658 से 1707 तक शासन किया और अपने साम्राज्य को चरम पर पहुँचाया.

अंतरराष्टीय मुद्रा कोष ने आगाह किया है कि एआई के कारण 40 फ़ीसदी नौकरियों पर असर पड़ेगा.
हालांकि कुछ जानकारों ने अपने लेखों में ये भी कहा है कि एआई के कारण नौकरियां जाएंगी, पर हुनरमंद लोगों के लिए एआई से संबंधित नई नौकरियां भी आएंगी.
एआई के कारण फेक न्यूज़ का ख़तरा भी बढ़ा है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक पार्टियों ने एआई का इस्तेमाल किया था.
सोशल मीडिया पर नामी लोगों की ऐसी कई तस्वीरें हैं, जो बिलकुल असली लगती हैं मगर वो एआई की मदद से बनाई हुई हैं.
चुनौतियां भले ही हों, मगर एआई के अलग-अलग प्लेटफॉर्म तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं और लोगों के बीच अपनी जगह बना रहे हैं. एलन मस्क अपने ट्वीट्स में ग्रोक को गूगल के विकल्प की तरह पेश कर रहे हैं.
ऐसी ही कोशिशें दूसरे एआई प्लेटफॉर्म्स की भी हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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