सीएसके की हार से ज़्यादा धोनी के नौवें नंबर पर उतरने की क्यों हो रही है चर्चा

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Getty Images महेंद्र सिंह धोनी ने 16 गेंदों में 30 रनों की पारी खेली

चेन्नई सुपरकिंग्स की घर में आरसीबी के हाथों 50 रनों की हार पर टीम के हीरो महेंद्र सिंह धोनी के काफ़ी देरी से बल्लेबाज़ी के लिए उतरने पर सबसे ज़्यादा सवाल उठ रहे हैं.

यह कहा जा रहा है कि धोनी अगर सातवें नंबर पर भी बल्लेबाज़ी के लिए उतरते तो मैच को थोड़ा संघर्षपूर्ण बनाया जा सकता था.

आर अश्विन के सातवें बल्लेबाज़ के रूप में आउट होने के समय तक 15.2 ओवर फेंके जा चुके थे और सीएसके को उस समय 26 गेंदों में 98 रन बनाने थे और मैच किसी हद तक हाथ से निकल चुका था.

धोनी अगर शिवम दुबे के आउट होने पर आते तो खेलने के लिए 43 गेंदें मिल सकती थीं.

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धोनी ने जिस तरह से 16 गेंदों में तीन चौकों और दो छक्कों से 30 रन बनाए, उसी तरह 43 गेंदें खेलते तो मैच की तस्वीर में ज़रूर थोड़ा बदलाव दिख सकता था.

धोनी के उतरने में देरी खल गई Getty Images महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करियर में सिर्फ़ दूसरी बार नौवें नंबर पर बल्लेबाज़ी की है

महेंद्र सिंह धोनी अपने 340 से ज़्यादा टी-20 मैचों के करियर में सिर्फ़ दूसरी बार नौवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करने उतरे. सही मायनों में उस समय तक खेल सीएसके के हाथों से निकल चुका था.

यह सही है कि उन्होंने क्रुणाल पांड्या के आख़िरी ओवर में दो छक्के और दो चौके लगाकर चेपक स्टेडियम की पिच पर आए दर्शकों को ख़ुश कर दिया. पर इतनी देरी से उतरना टीम के काम नहीं आ सका.

चेपक मैदान पूरी तरह से सीएसके के पीले रंग से रंगा हुआ था. इसमें सबसे बड़ा योगदान धोनी का ही माना जाता है.

इस कारण दर्शकों को सबसे ज़्यादा चाहत धोनी को बल्लेबाज़ी करते देखने की होती है.

वह जब बल्लेबाज़ी करने उतरे तो उस समय 120 डेसीबल का शोर मैदान से उठ रहा था. अपने इन दीवानों की ख़ातिर धोनी को टीम जिताने की ज़िम्मेदारी को और गंभीरता से उठाना चाहिए था.

पिछले कुछ सालों से धोनी आखिरी 10-12 गेंदें बाकी रहने पर ही खेलने आते रहे हैं और इस दौरान कई बार वह 20-25 रन बनाकर जीत के हीरो बनते रहे हैं. लेकिन इस मैच में हालात को देखते हुए जल्दी आना चाहिए था पर वह अश्विन के भी बाद नौवें नंबर पर उतरे और मैच हाथ से जाने दिया.

रायडू ने कहा धोनी को पहले उतरना चाहिए था BBC धोनी ने 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से अपनी पारी को 10-15 गेंदों तक सीमित कर दिया है

महेंद्र सिंह धोनी के साथ लंबे समय तक खेले अंबाती रायडू ने कहा कि चेन्नई की जनता सीएसके से ज़्यादा धोनी से प्यार करती है. इस कारण ही उन्हें थाला (लीडर) कहती है.

धोनी ने 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से अपनी पारी को 10-15 गेंदों तक सीमित कर दिया है.

उन्होंने कहा कि यह मौका था, जब उन्हें ज़िम्मेदारी उठाकर थोड़ा पहले उतरना था. वह ऐसा करते तो मैच रोमांचक बन सकता था.

उन्होंने कहा कि कई बार दर्शक धोनी को खेलते देखने के लिए बल्लेबाज़ी कर रहे बल्लेबाज़ के आउट होने की कामना करने लगते हैं, पर इस तरह की भावना खेल के लिए अच्छी नहीं है.

वह कहते हैं कि धोनी के सुपरस्टार वाला दर्जा कम होने वाला नहीं है पर कई बार इससे अन्य खिलाड़ियों का खेल प्रभावित हो जाता है.

आरसीबी को क़िस्मत बदलने में लगे 17 साल

आरसीबी ने चेपक मैदान पर सीएसके को 2008 में फ़तह किया था. इसके बाद उसे लगातार हार का ही सामना करना पड़ा. वह अब आठ हारों के बाद फिर से जीत की पटरी पर लौटने में सफल हुई है.

आरसीबी ने इस जीत से एक तरफ़ अपनी हार के सिलसिले को तोड़ा, दूसरी तरफ धोनी-धोनी की आवाज़ लगाने वाले स्टेडियम के माहौल को आख़िरकार आरसीबी-आरसीबी के नारों में बदलने में सफलता प्राप्त कर ली.

क़िस्मत के धनी पाटीदार रहे जीत के हीरो Getty Images रजत पाटीदार ने 32 गेंदों में 51 रन बनाए

रजत पाटीदार को इस फ़ॉर्मेट में विस्फोटक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करने वाला माना जाता है.

इस खूबी की वजह से ही उन्हें आरसीबी के ख़िताब के सपने को साकार करने के लिए कप्तान बनाया गया है. उन्होंने भी किसी भी स्थिति में अपने विस्फोटक अंदाज़ में कमी नहीं आने दी है.

रजत पाटीदार ने 32 गेंदों में चार चौकों और तीन छक्कों से 51 रन की पारी खेलकर टीम के स्कोर को 196 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

इसमें उन्हें दीपक हुडा और राहुल त्रिपाठी से भी अच्छा सहयोग मिला. दीपक ने तो आसान से कैच को टपका दिया, तब वह 19 रनों पर ही थे. वहीं राहुल ने मुश्किल कैच छोड़ा.

आरसीबी के स्कोर को 200 के क़रीब पहुंचाने में टिम डेविड के योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता है.

उन्होंने आठ गेंदों में तीन छक्कों और एक चौके से 22 रन बनाकर दिखाए. अगर उन्हें ज़्यादा गेंदें खेलने को मिलतीं तो उनका बल्ला और रन उगल सकता था.

पॉवरप्ले में ही तय हो गया भाग्य

सीएसके का सही मायनों में भाग्य पॉवरप्ले में ही तय हो गया था. पहले 4.4 ओवरों में ही राहुल त्रिपाठी, ऋतुराज गायकवाड़ और दीपक हुडा आउट होकर लौट गए थे और स्कोर पहुंचा था, सिर्फ 26 रन.

इस कारण वह इस मैदान पर आईपीएल में अब तक पॉवरप्ले में सबसे कम स्कोर 30 रन बना सकी.

इसमें स्ट्राइक गेंदबाज़ जोश हेजलवुड की गेंदबाजी ने अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने पहले दो ओवरों में नौ गेंदें डॉट डालीं और दो विकेट निकालकर सीएसके को तगड़ा झटका दे दिया.

उन्होंने इस मैच में चार ओवरों में 21 रन देकर तीन विकेट निकाले. वह टेस्ट मैचों की तरह ही यहां भी गेंदबाज़ी करते हैं और उन्हें खेलना किसी भी बल्लेबाज़ के लिए आसान नहीं होता है.

हेजलवुड को शुरुआत में भुवनेश्वर कुमार से भी अच्छा साथ मिला. उन्होंने स्विंग का अच्छा इस्तेमाल करके दबाव को बनाए रखने में अच्छा योगदान किया. उन्होंने 20 रन देकर एक विकेट निकाला.

आरसीबी की इस सत्र में गेंदबाज़ी बहुत ही अच्छी दिख रही है. पेस गेंदबाज़ों द्वारा बनाए दबाव से बाद में स्पिनरों ने कभी बाहर नहीं निकलने दिया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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