डीपफ़ेक पोर्न तस्वीर ने बदल दी एक टीचर की ज़िंदगी, दक्षिण कोरिया में ऐसे बढ़ रहा संकट

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BBC दक्षिण कोरिया में डीपफ़ेक तकनीक का इस्तेमाल कर टीचरों की अश्लील तस्वीरें बनाई गईं

ई गा-युन अक्सर घर पर रह-रहकर रोने लगती हैं और उनका आठ साल का बेटा उन्हें संभालता है.

एक दशक तक, उन्होंने दक्षिण कोरियाई शहर बुसान में खुशी-खुशी टीचर के तौर पर काम किया.

लेकिन पिछले साल मार्च में, उनकी दुनिया तब उलट गई जब एक छात्र ने उनके चेहरे की तस्वीर एक नग्न शरीर पर लगाकर शेयर कर दी. ये सब डीपफ़ेक टेक्नोलॉजी से किया गया था.

ये तस्वीर एक टेलीग्राम चैनल पर अपलोड की गई थी. गा-युन (ये टीचर का असली नाम नहीं है) का मानना है कि उनके कई छात्रों ने वो तस्वीर देखी.

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BBC डीपफ़ेक तकनीक का शिकार हुईं शिक्षिकाएं

वह कहती हैं, "जब भी मेरे स्टूडेंट मुझे देखते, तो मुझे लगता कि उन्होंने वो तस्वीर देखी है और वही चेक करने के लिए वो मेरी ओर देख रहे हैं. मैं उनकी आँखों में देख नहीं सकती और अब उन्हें ठीक से पढ़ा नहीं सकती."

गा-युन सात महीने से मेडिकल लीव पर हैं.

वह कहती हैं, "मैं बचपन से ही टीचर बनना चाहती थी, और मेरा सपना कभी नहीं बदला. लेकिन अब, अवसाद और चिंता के कारण, मुझे दिन में पांच गोलियां लेनी पड़ती हैं. मैं अभी भी कमज़ोर महसूस करती हूं, और मुझे लगता है कि बेहतर होने में कुछ समय लगेगा."

लगभग एक साल पहले, ज्योंगी प्रांत के एक मिडिल स्कूल में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाली टीचर, जिन्हें हम यहां पाक सेही का नाम दे रहे हैं, उनकी तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई थी. उनकी डीपफ़ेक तस्वीर डीसी इनसाइड नाम की वेबसाइट पर डाली गई थी.

पाक सेही की मूल तस्वीर एक मैसेजिंग ऐप से ली गई थी, जिसका इस्तेमाल वो सिर्फ अपने स्टूडेंट्स से संपर्क करने के लिए करती थीं. पाक सेही के चेहरे की तस्वीर और एक अनजान आदमी की तस्वीर यौन क्रिया में लिप्त दो बंदरों के शरीर पर लगाई गई थी.

तस्वीर के साथ लिखा गया था, "अपने बेटे के साथ सेक्शुअल इंटरकोर्स करती पाक सेही."

BBC दक्षिण कोरिया के स्कूलों में डीपफ़ेक पोर्न का चलन चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है.

वह कहती है कि उन्हें ऐसा गहरा धक्का लगा था कि वो ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थीं.

वो कहती हैं, "मैं आधी रात को गुस्से में उठती, मैं अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पा रही थी. मैं बहुत असहाय महसूस कर रही थी. मेरे लिए ये बात असहनीय थी कि उन्होंने इसमें मेरे बेटे को भी शामिल किया."

"मैं इन स्टूडेंट्स के साथ उनके पहले साल से ही थी, और हमने तीन साल साथ बिताए थे. मैं उनकी परवाह करती थी, और वे मुझे बहुत पसंद करते थे. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध थे. वे अच्छे छात्र थे, इसलिए यह बहुत बड़ा झटका था."

उन्होंने अपने छात्रों से कहा कि जिसने भी ये सब किया, अगर वो अपनी गलती मान लें, तो वो पुलिस को रिपोर्ट नहीं करेंगी. लेकिन कोई भी आगे नहीं आया. आखिर में पाक सेही पुलिस के पास गईं, लेकिन पुलिस ने कहा कि उन्हें कोई सबूत नहीं मिला.

पाक सेही के मुताबिक पुलिस ने उनसे पूछताछ किए बिना ही मामला बंद कर दिया. इसके बाद पाक सेही ने ये पता लगाने की कोशिश ही छोड़ दी कि इसके पीछे कौन ज़िम्मेदार था.

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दक्षिण कोरिया में डीपफ़ेक पोर्न संकट

हाल ही में स्कूलों में डीपफ़ेक पोर्न के बढ़ते चलन से दक्षिण कोरिया में हलचल मच गई है. बीबीसी ने रिपोर्ट की कि सितंबर में इससे 500 से अधिक स्कूल और विश्वविद्यालय प्रभावित हुए.

अगस्त 2024 में, कोरियाई शिक्षक और शिक्षा कर्मचारी संघ (केटीयू) ने एक सर्वेक्षण किया. इसमें पूछा गया कि क्या टीचर और स्टूडेंट्स कभी अपनी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ का शिकार हुए हैं, इसमें 2,492 मामले सामने आए.

पीड़ितों में माध्यमिक, प्राथमिक और विशेष स्कूलों और यहां तक कि किंडरगार्टन के स्टूडेंट्स भी शामिल थे. कुल मिलाकर, 517 व्यक्ति प्रभावित हुए, इनमें 204 टीचर थे, 304 स्टूडेंट थे और बाकी स्कूल के कर्मचारी थे.

हालांकि, कई पीड़ित कभी पुलिस के पास नहीं जाते, लेकिन रिपोर्ट किए जाने वाले मामलों की संख्या बढ़ रही है. दक्षिण कोरिया में, पुलिस के पास दर्ज होने वाले डीपफ़ेक यौन अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. साल 2021 में ये संख्या 156 थी, जो 2024 में बढ़कर 1,202 हो गई.

पिछले साल के अंत में जारी किए गए पुलिस डेटा से पता चलता है कि गिरफ्तार किए गए 682 लोगों में से 548 किशोर थे. इनमें से 100 से अधिक 10 से 14 साल की उम्र के बच्चे थे, जिन पर उनकी उम्र के कारण मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और न ही अपराधी के तौर उन्हें सजा दी जा सकती है.

लेकिन डीपफ़ेक पोर्न संकट के बारे में लोगों के अधिक जागरूक होने के बावजूद, शिक्षकों को पुलिस की ओर से निराशा महसूस हुई है.

BBC ऐसे भी मामले हैं, जिनमें पीड़ित ने खुद अपराधी का पता लगाने की कोशिश की

इंचयोन के एक हाई स्कूल में टीचर, जिन्हें हम यहां ज़िही कह रहे हैं, को एक्स पर एक पोस्ट दिखाई गई. इस पोस्ट में 'टीचर ह्यूमिलीएशन' हैशटैग के साथ उनके शरीर के अंगों के क्लोज-अप दिखाए गए थे. वह बताती हैं कि उन्होंने तस्वीरों की रिपोर्ट पुलिस में की, लेकिन कोई कार्रवाई न किए जाने से उन्हें निराशा हुई. इसके बाद उन्होंने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया.

उन्होंने देखा कि वो तस्वीरें एक खास क्लास रूम से ली गई थीं. उन्होंने तस्वीर में कमरे की कुर्सियों के हर कोण का सावधानी से विश्लेषण किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि तस्वीरें किसने लीं.आखिरकार उन्हें थर्ड ईयर के एक छात्र पर शक हुआ.

ज़िही कहती हैं, "पीड़ित होने के बावजूद, यह निराशाजनक था कि मुझे जानकारी जुटाने के लिए इस तरह की तस्वीरों को देखना पड़ता था."

10 पन्नों की रिपोर्ट जमा करने के बाद, पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन पाया कि मामले में पर्याप्त सबूत नहीं थे. हालांकि, जिस छात्र पर ज़िही को शक था, उस पर एक दूसरे मामले में आरोप लगाया गया है. ये मामला ज़िही की एक सहकर्मी से जुड़ा है.

पीड़ित टीचरों के सामने और भी चुनौतियां

शिक्षकों से अक्सर यह अपेक्षा की जाती है कि वे पीड़ित होने के बाद भी अपना काम जारी रखें, भले ही जिस पर शक हो, वो छात्र उनकी क्लास में मौजूद हो. वहीं अगर कोई स्टूडेंट डीपफेक का शिकार होने की रिपोर्ट करे, तो उसे तुरंत क्लास से बाहर किया जा सकता है.

गा-युन जैसे कुछ लोगों ने बीमारी की छुट्टी ली है. लेकिन अगर यह छुट्टी एक हफ्ते से अधिक हो जाती है, तो टीचर को स्कूल समिति की समीक्षा से गुज़रना होता है. कभी-कभी छुट्टी की अपील खारिज़ कर दी जाती है. इसका मतलब है कि पीड़ित टीचर को अपनी सालाना छुट्टी लेनी होगी.

वहीं मार्च महीने के अलावा साल के किसी और महीने दूसरे स्कूल में ट्रांसफर भी संभव नहीं होता.

गा-युन कहती हैं, "मुझे नहीं पता कि यह डीपफेक है जो मुझे परेशान कर रहा है या फिर शिक्षा अधिकारियों के साथ लड़ाई मुझे परेशान कर रही है."

बुसान शिक्षा कार्यालय में एक स्कूल पर्यवेक्षक, किम सून-मी ने कहा, "ऐसा कोई कानून या मैनुअल नहीं है जो यह बताता हो कि शिक्षकों को उन छात्रों से तुरंत कैसे अलग किया जाए जो अपराधी हैं. या फिर उन्हें कितने वक्त तक अलग रखना चाहिए."

इसमें सिर्फ एक बात ये है कि अगर किसी स्टूडेंट की हरकतें "दूसरों के सीखने के अधिकारों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं", तो उसे क्लास में पीछे भेजा जा सकता है.

उस स्टूडेंट के माता-पिता से उसे घर पर पढ़ाने की अपील की जा सकती है, लेकिन अगर वो इससे इनकार करते हैं तो इसे लागू नहीं किया जा सकता है.

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गा-युन का यह भी मानना है कि छात्रों को डीपफेक पोर्न की गंभीरता के बारे में शिक्षित करने के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है.

पिछले साल दिसंबर में शिक्षा मंत्रालय ने 2,000 से अधिक मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों के बीच एक सर्वेक्षण किया था. इसमें छात्रों में डीपफेक से संबंधित अपराधों के बारे में जागरूकता की कमी का पता चला. डीपफेक यौन अपराधों की वजहों के बारे में पूछे जाने पर, 54% छात्रों ने 'सिर्फ़ मनोरंजन' को सबसे बड़ा कारण बताया.

गा-युन कहती हैं कि उत्पीड़न दूसरे रूप भी ले सकता है. वो पिछले साल की एक घटना बताती हैं, जब एक छात्र ने महिला टीचरों के शौचालय में कैमरा लगाया था. वह आगे कहती हैं कि क्लास में, कुछ छात्र अक्सर यौन टिप्पणियां करते हैं. यहां तक कि अपने साथ पढ़ने वालों को महिला टीचरों की ओर धकेल देते हैं.

गा-युन के मुताबिक जब वो ऐसे छात्रों को टोकती हैं, तो वे इस बर्ताव को सिर्फ 'एक शरारत' का नाम दे देते हैं. बहुत से बच्चे स्थिति की गंभीरता को नहीं समझते. वो बताती हैं, "वे कहते हैं, 'मुझे नहीं पता था कि यह वास्तव में एक अपराध है'."

16 साल की यू जी-वू (असली नाम नहीं) बताती हैं कि उनकी एक सहपाठी डीपफेक पोर्न का शिकार हुई थी. यू जी-वू का कहना है कि वो इस बात से हैरान हैं कि इस मुद्दे पर देश भर में शिक्षा क्यों नहीं दी गई.

वो कहती हैं, "हमें उम्मीद थी कि देश भर के स्कूलों में शिक्षा दी जाएगी, चाहे कोई घटना हुई हो या नहीं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ."

शिक्षा मंत्रालय में लैंगिक समानता नीति प्रभाग की निदेशक चंग इल-सन कहती हैं, मंत्रालय डीपफेक यौन अपराधों को 'एक बहुत गंभीर मामला' मानता है.

वो कहती हैं, "हमने स्कूलों और समितियों को यह सुनिश्चित करने के लिए अधिसूचनाएं भेजी हैं कि अपराधियों से निपटने में कोई नरमी न बरती जाए और सख्त कदम उठाए जाएं."

उन्होंने कहा कि मंत्रालय का मुख्य ध्यान शिक्षा, जागरुकता अभियान और दूसरी कोशिशों से यह सुनिश्चित करना है कि लोग समझें कि यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि अपराध है.

वो कहती हैं, "शिक्षा मंत्रालय सहित सरकार ने इसके लिए कड़ी मेहनत की है, और अब आम तौर पर छात्र समझते हैं कि डीपफेक सामग्री आपराधिक है."

कोरियाई राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी के एक वरिष्ठ निरीक्षक ई योंग-से ने कहा कि क्षेत्रीय पुलिस बलों में साइबर यौन हिंसा जांच दल हैं. अधिकारियों को अंडरकवर और साइबर अपराध जांच में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है.

पुलिस ने यह भी कहा कि उनकी कार्रवाई से ऐसे मामलों की संख्या घट रही है.

'बस वो यादें मिट जाएं' BBC पीड़ित टीचर उन यादों को मिटाना चाहती हैं

ज़िही चाहती हैं कि उनकी पुरानी ज़िंदगी उन्हें वापस मिल जाए, जो उनकी डीफफेक तस्वीर बनने से पहले के दिन थे.

वो कहती हैं, "अगर कोई मुझसे पूछे कि मैं इस घटना से पहले के समय में वापस जाने के लिए क्या कर सकती हूं, तो मैं इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं. मैं चाहती हूं कि वो यादें मिट जाएं और चीज़ें पहले जैसी हो जाएं."

उन्हें वे स्टूडेंट भी याद हैं, जिन्होंने उन्हें साहस दिया था.

गा-युन कहती हैं कि उन्हें उस दिन का इंतज़ार है, जब दोषी छात्र उनसे माफी मांगेंगे. उन्हें लगता है कि एक टीचर होने के नाते यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि वे अपने किए की गंभीरता को समझें.

वो लड़खड़ाती आवाज़ में कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि आप समझें कि यह कभी भी सिर्फ़ एक मज़ाक नहीं था. मुझे लगता है कि आपको बाद में दोषी महसूस हुआ होगा. आपने जो शरारतें कीं...उससे मुझे बहुत दर्द पहुंचा."

"इससे मेरी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई."

युजिन चोई और ह्युनजंग किम की रिपोर्टिंग के साथ

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