मोहम्मद यूनुस चीन से बांग्लादेश के लिए क्या लाए, भारत को क्या तीस्ता प्रोजेक्ट पर मिला झटका?

चीन की अपनी यात्रा के दौरान बांग्लादेश अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने तीस्ता प्रोजेक्ट में चीनी कंपनियों को शामिल होने का न्योता दिया है.
प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हुए कई समझौतों में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक्स पर एक में बताया कि प्रोफ़ेसर यूनुस और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को मुलाक़ात हुई जिसमें कई मुद्दों पर सहमति बनी है.
माओ निंग के अनुसार, "बांग्लादेश के प्रति अच्छे पड़ोसी होने और दोस्ताना बने रहने की चीन की नीति में स्थिरता और निरंतरा बनी हुई है और बांग्लादेश के साथ अच्छा पड़ोसी, अच्छा दोस्त और आपसी भरोसे के साथ अच्छा पार्टनर बने रहने के लिए चीन प्रतिबद्ध है."
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के अनुसार, मोहम्मद यूनुस के साथ चीन गए उनके प्रेस सेक्रेटरी शफ़ीक़ुल आलम ने यूनुस और शी जिनपिंग के बीच मुलाक़ात को 'बहुत अहम और सफल' बताया है.
26-27 मार्च को हेनान में बोओ फ़ोरम फ़ॉर एशिया 2025 की सालाना बैठक के बाद प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस 28 मार्च को बीजिंग पहुंचे. जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की और प्रेसीडेंशियल होटल में चीनी उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की.
मोहम्मद यूनुस जब से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार बने हैं, यह चीन का उनका पहला द्विपक्षीय दौरा है.
शुक्रवार को बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से प्रोफ़ेसर यूनुस की मुलाक़ात के बाद आर्थिक समेत कई मुद्दों पर सहमति बनी.
दोनों देशों की ओर से जारी एक में कहा गया है कि दोनों देशों ने शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के पांच उसूलों पर अडिग रहने पर सहमति जताई.
बयान के अनुसार, "बांग्लादेश ने तीस्ता रिवर कॉम्प्रीहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट (टीआरसीएमआरपी) में चीनी कंपनियों को आमंत्रित किया." साथ ही यारलुंग ज़ांगबो-जमुना (ब्रह्मपुत्र) से जुड़े जल संसाधन की सूचनाओं के आदान प्रदान पर भी सहमति बनी.
"बांग्लादेश ने चटगांव में चाइनीज़ इकोनॉमिक एंड इंडस्ट्रियल ज़ोन (सीईआईज़ेड) को और विकसित करने के लिए चीन के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई."
इसके अलावा बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट फ़ेसिलिटीज़ मॉडर्नाइजेशन एंड एक्सपैंशन प्रोजेक्ट में भागीदारी के लिए चीनी कंपनियों को आमंत्रित किया है.
संयुक्त बयान के मुताबिक़, "दोनों पक्ष औद्योगिक और सप्लाई चेन में आंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने, हाई क्वालिटी बेल्ट एंड रोड कोऑपरेशन को आगे बढ़ाने और दोनों देशों में आधुनिकीकरण को एकसाथ बढ़ावा देने पर सहमति जताई."
दोनों देशों के बीच फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए) और बांग्लादेश इनवेस्टमेंट पर जल्द ही वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी.
बांग्लादेश ने वन चाइना पॉलिसी के प्रति अपने समर्थन को दोहराया.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश 'वन चाइना पॉलिसी सिद्धांत' के प्रति प्रतिबद्ध है और ताईवान को 'चीन का अभिन्न हिस्सा' मानता है. बांग्लादेश ने चीन को आश्वासन दिया कि दोनों देश मिलकर 'बराबरी के आधार पर बहुध्रुवीय दुनिया' की वक़ालत करेंगे.
बयान के अनुसार, "चीन अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दख़ल न देने के सिद्धांत का लगातार पालन करता है, बांग्लादेश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है, बांग्लादेश को अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता की रक्षा करने का समर्थन देता है."
"साथ ही चीन, अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल बांग्लादेश को अपना रास्ता चुनने का समर्थन करता है."
बयान में कहा गया है कि 2025 का साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कूटनीतिक रिश्ते का 50वां साल है दोनों देशों ने संस्कृति, टूरिज़्म, मीडिया, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के क्षेत्र में आदान प्रदान को और बढ़ाने पर सहमति जताई.
दोनों देशों ने मैरीटाइम सहयोग पर वार्ता के नए दौर की शुरुआत करने पर सहमति जताई है.
चीन के यूनान प्रांत में बांग्लादेश से आने वाले मेडिकल टूरिस्ट के इलाज के लिए बेहतर हालात बनाने के लिए बांग्लादेश ने चीन की सराहना की.
बांग्लादेश ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने यहां आने का आमंत्रण भी दिया है.

तीस्ता नदी परियोजना भारत और बांग्लादेश के बीच काफ़ी समय से एक प्रमुख मुद्दा रहा है और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय से ही इसे सुलझाने की कोशिशें होती रही हैं.
लेकिन बीते अगस्त में शेख़ हसीना की सरकार के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच काफ़ी तल्ख़ी देखने को मिली है. इस बीच चीन और पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ क़रीबी बढ़ाने की कोशिशें तेज़ की हैं.
कुछ विश्लेषक ताज़ा घटनाक्रम को भारत के लिए झटके के रूप में देख रहे हैं.
वैश्विक नीति पर काम करने वाले एक अमेरिकी थिंकटैंक में राष्ट्रीय सुरक्षा एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मामलों के जानकार डेरेक जे. ग्रासमैन ने एक्स पर , "सॉरी इंडिया. यूनुस का बीजिंग दौरा काफ़ी बढ़िया जा रहा है."
सत्ता से बेदख़ल किए जाने से एक महीने पहले ही बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना चीन के दौरे को बीच में छोड़कर वापस लौट गई थीं. बाद में उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि यह परियोजना भारत पूरा करे.
उस समय कुछ में कहा गया कि चीन की ओर से हसीना के मन मुताबिक़ वित्तीय मदद का आश्वासन नहीं मिला, जिससे वह नाख़ुश थीं.
जब वो जून 2024 में चीन गई थीं तो उन्होंने इस परियोजना के लिए कराने का अनुरोध करने की बात कही थी, हालांकि इससे एक महीने पहले यानी मई 2024 में ही भारतीय विदेश सचिव के ढाका दौरे के दौरान बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने कहा था कि भारत इस परियोनजा में आर्थिक सहायता देना चाहता है.
लेकिन इस बीच एक व्यापक जनउभार के बाद शेख़ हसीना की सरकार चली गई और अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली.
एक अरब डॉलर की तीस्ता नदी विकास परियोजना से भारत की सुरक्षा चिंताएं जुड़ी हुई हैं और यह परियोजना चीन के पास जाती है तो ये भारत के लिए बड़े झटके की तरह होगा.
414 किलोमीटर लंबी तीस्ता नदी भारत से बहती हुई बांग्लादेश में जाती है. बांग्लादेश में इस नदी पर एक बैराज स्थापित करने और कटाव को रोकने का एक मास्टर प्लान बनाया गया.
एक अरब डॉलर की (टीआरसीएमआरपी) से भारत की सुरक्षा चिंताएं जुड़ी हुई हैं. यह दोनों देशों के बीच सालों से लंबित जल बंटवारे से भी जुड़ा मुद्दा है.
इस परियोजना के तहत बाढ़ पर अंकुश लगाना, कटाव रोकना और ज़मीन दोबारा हासिल करने जैसे काम किए जाने हैं. इस परियोजना के तहत बांग्लादेश वाले हिस्से में एक बैराज का निर्माण किया जाना है.
कई जगहों पर तीस्ता की चौड़ाई पांच किलोमीटर है, उसे कम किया जाएगा. कुछ जगहों पर नदी की गहराई भी बढ़ाई जानी है और तटबंधों को मज़बूत किया जाना है.
इस परियोजना के ज़रिए तटीय इलाक़ों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी कम हो जाएंगी.
साल 2011 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ढाका दौरे के दौरान ही तीस्ता समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना था. लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण वह अधर में लटक गया.
साल 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के एक साल बाद 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ममता बनर्जी को साथ लेकर बांग्लादेश के दौरे पर गए थे. वहां उन्होंने तीस्ता के पानी के बँटवारे पर एक समझौते की सहमति का भरोसा दिया था.
लेकिन एक दशक बाद भी भारत और बांग्लादेश इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान निकालने में कामयाब नहीं हो पाए.
भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू के अनुसार, बांग्लादेश के प्रमुख सलाहकार शफ़ीक़ुल आलम के हवाले से कहा गया था कि मोहम्मद यूनुस पहले भारत आना चाहते थे लेकिन नई दिल्ली से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.
ख़बर के अनुसार, शफ़ीक़ुल आलम ने कहा, "हमने इच्छा ज़ाहिर की थी और चीन के दौरे को अंतिम रूप दिए जाने से हफ़्तों पहले ही, चीफ़ एडवाइज़र प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस के द्विपक्षीय दौरे के लिए पिछले दिसंबर में ही भारतीय पक्ष से पूछा था. दुर्भाग्य से हमें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला."
यूनुस ने इससे पहले पिछले साल सितम्बर में अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात की थी.
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 'अगले महीने 3-4 अप्रैल को बैंकॉक में बिमस्टेक समिट तय है और ढाका ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मीटिंग तय करने का निवेदन किया है. बांग्लादेश को अभी भी भारत के जवाब का इंतज़ार है.'
इस मामले पर भारत की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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