नासा ने बताई सुनीता विलियम्स की अंतरिक्ष से वापसी की नई तारीख़

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विल्मोर की वापसी 19 और 20 मार्च को हो सकती है. यह दोनों क़रीब दस महीने से अंतरारष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में रहे हैं.
दोनों ने 5 जून 2024 को इस परीक्षण मिशन के लिए स्टारलाइनर अंतरिक्षयान से उड़ान भरी थी. उन्हें आठ दिन के बाद वापस लौटना था.
स्टारलाइनर अंतरिक्षयान जब आईएसएस के क़रीब पहुंचा तो उसमें समस्याएं पैदा हो गईं और इसके पांच थ्रस्टर्स बंद हो गए, जो यान को दिशा देते हैं.
इसमें हीलियम भी ख़त्म हो गया. इससे जलने वाले ईंधन पर यान को निर्भर होना पड़ा और दोनों अंतरिक्षयात्रियों की वापसी अटक गई.
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61 साल के विल्मोर और 58 साल की सुनीता को बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुँचाया था. यह अपनी तरह की पहली उड़ान थी जिसमें लोग सवार थे.
यह एक परीक्षण था जिसका मक़सद यह देखना था कि नया अंतरिक्ष यान नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने से पहले कैसा प्रदर्शन करता है?
हालांकि यह जैसे-जैसे आगे बढ़ा इसमें कुछ समस्याएं सामने आने लगीं. इसके प्रोपल्शन सिस्टम में लीक हुआ और कुछ थ्रस्टर्स भी बंद होने लगे.
अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने की ज़िम्मेदारी एलन मस्क को सौंपी है. नासा के मुताबिक उन्हें 19 या 20 मार्च के आसपास वापस लाया जा सकता है.
नासा के स्पेसएक्स क्रू-9 के सदस्यों ने अंतरिक्ष से रवाना होने के पहले एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए सभी से बात की.
नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हॉज, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने 4 मार्च 2025 को अंतरिक्ष से एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित किया.

पिछले नौ महीने से भी अधिक समय से सुनीता विलियम्स आईएसएस में हैं. इसके साथ ही वो अंतरिक्ष में लगातार सबसे लंबे समय तक ठहरने वाली पहली महिला बन गई हैं.
वैसे सुनीता का यह कोई पहला रिकॉर्ड नहीं है. उन्होंने अंतरिक्ष में 22 घंटे 27 मिनट तक चहलक़दमी कर किसी महिला द्वारा अब तक के सबसे लंबे स्पेस वॉक का रिकॉर्ड भी बनाया था.
इससे पहले यह रिकॉर्ड अंतरिक्ष यात्री कैथरीन थार्नटन के नाम था. उन्होंने 21 घंटे से अधिक समय तक के स्पेस वॉक का रिकॉर्ड बनाया था.
सुनीता विलियम्स की यह तीसरी अतंरिक्ष यात्रा है. तीनों यात्राओं को मिलाकर अब तक नौ बार स्पेसवॉक कर चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने 62 घंटे 6 मिनट स्पेसवॉक में बिताए हैं.
सुनीता विलियम्स सेवानिवृत्त नौसेना हेलीकॉप्टर पायलट है, जबकि विल्मोर पूर्व लड़ाकू जेट पायलट हैं. वो भी पहले दो बार अंतरिक्ष की यात्रा कर चुके हैं.
कौन हैं सुनीता विलियम्स?सुनीता लिन विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं. नासा ने कल्पना चावला के बाद भारतीय मूल की सुनीता लिन विलियम्स को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के 'एक्सपीडिशन-14' के दल में शामिल किया.
सुनीता की पैदाइश अमेरिका के ओहायो में 1965 में हुई थी. उनके पिता 1958 में गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से आकर अमेरिका में बस गए थे.
सुनीता के पिता दीपक पांड्या और माँ बोनी पांड्या हैं. सुनीता के पति माइकल विलियम्स खुद भी पायलट हैं और अब एक पुलिस अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं.
नासा ने 1998 में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर सुनीता को चुना. स्थानीय पत्रकार सलीम रिज़वी के अनुसार सुनीता अमेरिकी नौसैनिक अकादमी की स्नातकोत्तर हैं और इसके अलावा वह एक कुशल लड़ाकू पायलट भी हैं.
उन्होंने 30 अलग-अलग तरह के विमानों पर 2700 से ज़्यादा घंटों की उड़ान भी भरी हुई है.
सुनीता विलियम्स ने अपनी पहली नौकरी नेवल एविएटर के तौर पर की थी.
जानिए सुनीता को कितनी मिलती है सैलरी?सुनीता ने 2013 में छात्रों को संबोधित करते हुए बताया था कि वह अंतरिक्ष में समोसे लेकर गई थीं. इसके साथ ही वह पढ़ने के लिए उपनिषद और गीता भी लेकर गई थीं.
उन्होंने भारतीय खाने की तारीफ करते हुए कहा था कि भारतीय खाने से कोई ऊब ही नहीं सकता.
अमेरिकी सरकार के ग्रेड पे के हिसाब से दी जाती है. इसमें सिविलियन ऐस्ट्रोनॉट्स के लिए जीएस-13 और जीएस-15 ग्रेड पे शामिल है.
यहां सभी सरकारी कर्मचारियों को वेतन जीएस-01 से जीएस-15 ग्रेड पे के अनुसार दिया जाता है. जीएस-15 ग्रेड पे यहां का सबसे उच्चतम ग्रेड पे है.
सुनीता विलियम्स को भी इसी ग्रेड पे के अनुसार सैलरी मिलती है.
जी एस-13: इसमें 81,216 से लेकर 105,579 डॉलर सालाना सैलरी का प्रावधान है.
जी एस-14: इसमें 95,973 से लेकर 124,764 डॉलर सालाना सैलरी मिलती है.
जी एस-15: इसमें 112,890 से लेकर 146,757 डॉलर सालाना सैलरी होती है.
ऐसे होगी सुनीता की वापसीसुनीता विलियम्स की वापसी के लिए नासा सभी विकल्पों पर काम कर रहा है. नासा के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम के प्रबंधक स्टीव स्टिच ने कुछ दिन पहले कहा था, "हमारा मुख्य मक़सद बुच और सुनीता को स्टारलाइनर पर वापस लाना है.हालांकि हमने उनके लिए अन्य विकल्प भी खुले रखे हैं."
स्टारलाइनर को धरती पर वापस लाना सुरक्षित नहीं माना गया तो उन्हें अंतरिक्ष से वापस लाने के लिए अब वैकल्पिक परिवहन के साधन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि एक संभावित विकल्प यह है कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को एक मिशन से जोड़ा जाए और 2025 में उस मिशन के साथ ही उन्हें धरती पर वापस लाया जाए.
अंतरिक्ष स्टेशन के लिए यह उड़ान 'स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन' यान भरेगी. इसकी शुरुआती योजना चार क्रू सदस्यों के साथ जाने की थी, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर इसमें दो सीटें खाली रखी जा सकती हैं.
हालांकि नासा अधिकारियों का अगला कदम क्या होगा? इसका कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया है.
बोइंग के लिए झटका होगा स्पेसएक्स का प्रयोगअंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए स्पेसएक्स यान का उपयोग करना बोइंग के लिए एक झटका होगा, जो कई साल से कंपनी और इसके अधिक अनुभवी क्रू ड्रैगन के साथ प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रहा है.
स्टारलाइनर यान को बोइंग ने ही तैयार किया है. बोइंग का यह पहला मानव मिशन है. वहीं अभी तक स्पेस एक्स ने अंतरिक्ष में नौ मानव मिशनों को पूरा किया है.
बोइंग के यान की यह पहली दिक्कत नहीं है. इसने पहली मानव रहित उड़ान 2019 में भेजी थी, सॉफ़्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से इंजन स्टार्ट नहीं हो पाया और यह अंतरिक्ष स्टेशन तक नहीं पहुंच पाया.
दूसरी कोशिश 2022 में की गई, लेकिन यान में फिर से कुछ थ्रस्टरों और यान के कूलिंग सिस्टम में दिक्कतें आईं थी.

स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन एक अंतरिक्ष यान है. इसे एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने विकसित किया है. इसके माध्यम से अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस तक लाया ले जाया जाता है.
इसे नासा की उस योजना के तहत विकसित किया गया था, जिसके तहत अंतरिक्ष स्टेशन की उड़ानों को अमेरिकी सरकार ने निजी कंपनियों को सौंप दिया था. इससे पहले अमेरिका रूसी प्रक्षेपणों पर निर्भर रहता था.
क्रू ड्रैगन 16 ड्रेको थ्रस्टर्स से लैस है. इसे फाल्कन 9 रॉकेट से लॉन्च किया जाता है. इसमें एक बार में सात अंतरिक्ष यात्री भेजे जा सकते हैं. इसे बार-बार प्रयोग किया जा सकता है.
यह यान अंतरिक्ष से वापसी में ध्वनि की गति से भी 25 गुना अधिक रफ़्तार से वायुमंडल से गुजरता है.
यह खुद ही अपने को दूसरे अंतरिक्ष यान से जोड़ सकता है. इसकी उड़ान के दौरान अगर किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो इसमें एक लॉन्च एस्केप सिस्टम भी लगा हुआ है, जो क्रू ड्रैगन को रॉकेट से तुरंत अलग कर देता है.
अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से नीचे लाने के लिए इसमें पैराशूट भी लगाए गए हैं. यह फ़्लाइट कंप्यूटर और थ्रस्टर्स फेल होने के बाद भी अंतरिक्ष यान चालक दल को सुरक्षित रूप से घर लाने में सक्षम है.
आईएसएस में दिनभर काम करने के बाद वक्त आता है रात के खाने का. खाना पैकेट में बंद होता है. ये सभी देशों के हिसाब से विभिन्न कंपार्टमेंट्स में बंटा होता है.
अंतरिक्ष यात्री रह चुकी निकोल स्टॉट कहती हैं, "ये कैंपिंग के खाने या मिलिट्री राशन की तरह होता है. अच्छा लेकिन स्वास्थ्य के हिसाब से लाभदायक भी. मेरी पसंदीदा खाने की चीज़ें जापानी करी या रूसी सूप हुआ करता था."
अंतरिक्ष यात्रियों के परिवार भी उनके लिए खाना भेज सकते हैं. स्टॉट ने बताया कि उनके बेटे और पति ने उनके लिए चॉकलेट की परत वालीं अदरक के आकार की चीज़ें भेजी थीं और ज़्यादातर समय लोग अपने खाने को एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं.
सुनीता विलियम्स भी अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा में समोसा लेकर गई थीं. अगस्त 2024 में नासा के अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बेरी 'बुच' विल्मोर के लिए करीब तीन टन खाना, ईंधन और दूसरी ज़रूरी चीज़ें की आपूर्ति रूस के मानवरहित कार्गो स्पेसक्राफ्ट से की गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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