Indian Railways: ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर की सैलरी सुनकर उड़ जाएंगे होश, जानें 8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ सकती है
इंडियन रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इस नेटवर्क को सफलता पूर्वक चलाने के लिए लाखों कर्मचारी काम करते हैं। इतने यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचाना कोई छोटा काम नहीं हैं।
इसके लिए बहुत अच्छी और सही प्लानिंग की जरूरत होती है। इसमें ट्रेन के ड्राइवर की अहम भूमिका होती है। ट्रेन के ड्राइवर को लोको पायलट कहा जाता है। ऐसे में बहुत से लोग सोच रहे होंगे कि आखिर ट्रेन के ड्राइवर की सैलरी कितनी रहती होगी, वहीं आठवां वेतन आयोग लागू होने के बाद आखिर बढ़कर कितनी हो जाएगी?
लंबे सफर के लिए आज लोग भारतीय रेलवे को पहली प्राथमिकता देते हैं। भारतीय रेलवे के जरिए रोजाना करीब 3 करोड़ लोग यात्री सफर करते हैं। ट्रेनों का संचालन इंडियन रेलवे की ओर से किया जाता है। ऐसे में जिसे ट्रेन चलाना है। उसकी अनुमति भी रेलवे की ओर से दी जाती है और उसे सैलरी भी रेलवे की ओर से दी जाती है। ऐसे में आइये जानते हैं लोको पायलट कैसे बनते हैं और कितनी सैलरी मिलती है ?
लोको पायलट की भर्ती प्रक्रिया
सबसे पहले बता दें कि सीधी भर्ती से लोको पायलट नहीं बन सकते हैं। शुरुआत में उम्मीदवारों को असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के तौर पर नियुक्त किया जाता है। इसके बाद उन्हें कठोर ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग और अनुभव हासिल करने के बाद ही उम्मीदवार को पूरी तरह से लोको पायलट के रूप में ट्रेन चलाने की अनुमति मिलती है। भारतीय रेलवे में लोको पायलट बनने के लिए कैंडिडेट्स को 10वीं पास होना जरूरी है। इसके साथ ही किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई (ITI) या डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग) होना जरूरी है। कैंडिडेट्स की उम्र 18 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के लिए उम्र में छूट मिलती है।
लोको पायलट की सैलरी
असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) की शुरुआती सैलरी 19,900 रुपये (लेवल-2) होता है। इसमें भत्ते जोड़कर कुल सैलरी 30,000 से 35,000 रुपये तक हो सकती है। वहीं सीनियर लोको पायलट की सैलरी 35,000 से 55,000 रुपये तक होती है। इसके साथ ही मुख्य लोको पायलट (Chief Loco Pilot) यानी अनुभवी ड्राइवर की सैलरी 60,000 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।
8वें वेतन आयोग पर कितनी होगी सैलरी?
8वें वेतन आयोग में सैलरी में 20-25 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इससे असिस्टेंट लोको पायलट की शुरुआती सैलरी करीब 25,000 रुपये हो सकती है। वहीं अनुभवी लोको पायलट की सैलरी 70,000 रुपये या इससे अधिक तक पहुंच सकती है।
ओवर टाइम का मिलता है अलग से पैसा
ट्रेन के ड्राइवरों को ओवर टाइम का भी पैसा मिलता है। कई बार ट्रेनें लेट हो जाती है। कभी आउटर में खड़ी रह जाती हैं। ड्राइवरों को अपनी ड्यूटी से ज्यादा समय देना होता है। ऐसे में ओवरटाइम का भी पैसा लोको पायलट को मिलता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कभी - कभी ओवरटाइम की वजह से लोको पायलट की सैलरी दोगुना तक पहुंच जाती है।
क्या ट्रेन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की होती है जरूरत?
कार या बस चलाने के लिए लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करना पड़ता है। इस तरह हवाई जहाज उड़ाने के लिए पायलट बनना पड़ता है। इसके लिए फ्लाइंग लाइसेंस की जरूरत होती है। लेकिन ट्रेन चलाने के लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है। इसकी भर्ती रेलवे बोर्ड की ओर से की जाती है। इन लोगों को ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद मंडल यांत्रिक इंजीनियर या मंडल विद्युत इंजीनियर की ओर से एक टेस्ट लिया जाता है। इसमें सफल होने वाले लोगों को कंपेटेंसी सर्टिफिकेट (competency certificate) मिलता है। इस सार्टिफिकेट को हासिल करने के बाद ट्रेन चलाने का मौका मिलता है।